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Monday, November 5, 2018
आइए, अपनी योग्यता, पसंद का जॉब पाएं। आपके एक विचार देश की स्थिति में बदलाव ला सकता है, लेकिन आपका विचार इसी तक सीमित नहीं है, क्योंकि आपका विचार अन्य किसी के लिए प्रेरणास्रोत बन सकता है। हो सकता है आपके विचार से कोई इतना प्रभावित हो कि वह अपने ज्ञान का परीक्षण करने के लिए अपनी योग्यता को व्यवहार में लाए। ज्ञान बांटने से बढ़ता है। इंसान को स्वयं खुश रहना होगा, तभी वह अपने विचार दूसरों के साथ साझा कर उसे प्रभावित कर सकता है। आपका एक विचार मोदी जी, डोनाल्ड ट्रम्प, एलिजाबेथ, करन जोहर, विराट कोहली या उत्तरी कोरिया के तानाशाह को अच्छा लग सकता है, उस दिन आपको अपना महत्व पता चलेगा, इसलिए अपने अंदर की शक्ति/ज्ञान को व्यक्त करने का प्रयास करें। आप इतनी गहराई तक सोच सकते हैं और ऐसी बात कहते हैं कि आपकी क्लासमेट आपसे दोस्ती करने को राजी हो जाती है, आपकी रचनात्मकता या सिर्फ आपके लिखे गए कुछ वाक्य या शब्दों से कोई गाना तैयार किया जाता है/ गानों में शामिल होते हैं, जो किसी फिल्म के डायरेक्टर को अच्छी लगते हैं, आपसे सुझाव चाहते है, तो उस समय आप अपना महत्व समझेंगे।
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Wednesday, February 21, 2018
आइए, भारत में हुए घोटालों से संबंधित सर्वेक्षण में भाग लेने के लिए यहां क्लिक करें
आज गरीब के लिए बहुत बड़ी बिडंबना है कि वह पैसे रखे तो कहां रखे – उसकी इतनी आमदनी नहीं कि बैंक खाते में बैंक के मानकों के अनुसार तय निर्धारित आवश्यक धनराशि बैंक में जमा रखने की शर्त को वह पूरी नहीं कर सकता है और न तो वह घर में पैसा रख सकता है, न जाने कब नोटबंदी की घोषणा हो जाए!
कभी लाल बहादुर शास्त्री जी ने नारा दिया था – जय जवान जय किसान! आज हमारे माननीय नेता नारा दे रहे हैं – घर में पैसा नहीं रख सकते हैं। जिनके पास दौलत है, शोहरत है, उनके पास कई बैंकों के बैंक कार्ड हैं, जिससे वे कोई भी लेनदेन कर सकते हैं। समस्या गरीब के लिए है – न पैसा, न कोई कार्ड।
Sunday, February 18, 2018
वर्तमान में भारत देश एक स्थिति से गुजर रहा है कि यहां सामान्य वर्ग व गरीब को अपने मुंह में एक निवाला लेते समय तक सोचना पड़ रहा है कि क्या कल भी यह निवाला मुझे उपलब्ध होगा?
स्थिति बहुत खराब है! गांधी सरकार हो मोदी सरकार – गरीब टैक्स दे रहा है और माल्या व निरव मोदी जैसे लोग मोटी रकम लेकर देश से पलायन कर चुके हैं, ये भारत की सच्चाई, जहां गरीब किसान को 20,000-50,000 हजार रूपए बैंक को न चुका पाने में असमर्थ होकर आत्महत्या करनी पड़ती है, जो बेचारा आपदा व फसल बर्बाद होने के कारण इस स्थिति में पहुंचता है। यहां पर बैंक को पता होता है और स्थानीय प्रशासन की मदद से गरीब को इतना परेशान पहुंचाया जाता है कि उसके पास और कोई रास्ता नहीं बचता है सिवाय आत्महत्या करने के।
गरीब को निचले स्तर से उठने का मौका ही नहीं दिया है। जिसके पास कम आमदनी थी और सरकार के निर्देशानुसार उसके बैंक खाते से जबरन अतिरिक्त शुल्क ले लिया गया कि उसके खाते में एक सीमा से अधिक पैसे जमा होने जरूरी हैं। जबकि एक भारी रकम का हस्तांतरण विदेशी बैंकों में होता है, इस पर बैंक व सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। इतनी विपत्ति में राजनेता गा रहे हैं – भारत माता की जय!
इतनी मोटी रकम देश से बाहर के बैंकों में ट्रांसफर होने का प्रत्यक्ष प्रभाव जिस पर पड़ रहा है वह है सामान्य वर्ग व गरीब जनता। राजनेताओं को इसका बिल्कुल असर नहीं पड़ता है, किसान मर रहा है व माल्या और निरव मोदी जैसे लोग देश में रिश्वतखोर नौकरशाही के सहयोग से इतनी मोटी रकम लेकर विदेशों में मौज कर रहे हैं – और राजनेता कह रहे हैं – भारत माता की जय!
भारत देश दुर्दशा में, लेकिन इस देश के मंत्रीगण और सरकारी नौकरशाह के लिए अमन-चैन!
विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य था – भारत में प्रभुत्व जमाना व देश को लूटना, और आज की राजनैतिक पार्टियों का लक्ष्य भी वही है – देश में प्रभुत्व जमाना और अत्याधुनिक सुविधाओं का आनंद लेते हुए देश को लूटना और अधिकाधिक रकम विदेशी बैंकों में जमा करना, जिससे उनके खानदान को जीवनभर ऐशोआराम मिलते रहें।
परिणाम भी समान हैं - विदेशी आक्रमणों के समय भारी नरसंहार हुआ था, जो आज भी राजनैतिक अव्यवस्था व सम्प्रदायवाद के चलते देश के अंदर विभिन्न-समुदायों, व्यापारी वर्गों व जनता के बीच दैनिक रूप में हो रहा है। योजनाएं लागू की जाती हैं – व्यवसाय मिलता है, कुछ विशेष वर्गों को!
घोटाले किए जाते हैं, पैसा विदेशी बैंको में जमा कर दिया जाता है। खून चूसा जाता है – सामान्य वर्ग का, गरीब का....
कभी विदेशी आक्रमणों का शिकार, तो कभी अपने विस्तारवाद नीति के अंतर्गत आंतरिक झगड़े-मनमुटाव के कारण एक राज्य/प्रांत का अन्य पर आक्रमण का सिलसिला। सैकड़ों वर्ष बीत गए, कई खोजें हुई, आधुनिक तकनीक, वैश्वीकरण जैसे कई शब्दों से मीडिया का बाजार गरम हुआ, कई सरकारें आईं, कई गईं, घोटाले हुए, मंत्री जेल गए, देश के संसाधनों का दुरूपयोग कर असीमित राशि एकत्र कर विदेशी बैंकों में जमा करवाया गया, गरीब जनता से कहा गया कि प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है, जल्द ही आप सभी को लाभ मिलेगा। धन्य हैं इस देश के मंत्रीगण और शासकीय वर्ग, जिसे जितना मिल रहा है, गैर-कानूनी तरीके अपनाकर अपने और अपनों के बैंक खाते, प्रापर्टी में इजाफा कर रहे हैं, वहीं सामान्य वर्ग के लोग प्रतीक्षारत हैं कि शायद कभी अच्छे दिन आएंगे। सरकार अपने स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों का प्रभुत्व कायम रखने के लिए अपने नेताओं और चहेतों की बहुमूल्य प्रतिमाएं बनाकर सरकारी संस्थाओं, सार्वजनिक निकायों में स्थापित करवा रही हैं।
ये पैसा, संसाधन कहां से आया है, जो आप लोग अपने पार्टियों पर खर्च कर रहे हैं, विदेशों से संसाधन जुटाकर अपने घरों को संपूर्ण सुविधायुक्त बनाकर अपने परिवार को दे रहे हैं क्या जनता की कोई जरूरत नहीं है?
जनता के नाम से सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन सामान्य वर्ग को सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पाता है, वहां पर राजनीति है, जिसकी लाठी उसकी भैंस! धनी लोग रिश्वत देकर व सरकारी तंत्र से जुड़े लोग प्रभुत्व जमाकर सुविधा पाने में सफल हो जाते हैं और गरीब बेचारा लाइन में खड़े-खड़े थककर खाली हाथ वापस घर जाता है, जो लाइन में लगने के कारण अपने काम पर नहीं जा पाया था। फिर यहां पर भी राजनीति शुरू हो जाती है, जो गरीब बेचारा लाइन में लगने के कारण अपनी दैनिक रोजमर्रा के काम पर नहीं जा पाता है, उसे हुए नुकसान पर पार्टियां एक दूसरे पर दोष लगाते रहते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी भारत में हुआ नोटबंदी और दैनिक रूप में राशन की दुकानों, अस्पतालों व सरकारी निकायों में होने वाली घटनाओं में शामिल है।
भारत देश, तेरी ऐसी विकराल स्थिति क्यों...... विदेशी आक्रमण का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है, प्रत्यक्ष उदाहरण भारत-पाक व भारत-चीन सीमाएं हैं, जहां से हर रोज कोई न कोई शिकार हो रहा है।
अब घोटाले करने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं – उदाहरण है - स्मार्ट सिटी...
वोट बैंक के लिए गांवों को गोद लेने की प्रथा जारी है। क्या और गांवों में रह रहे लोगों की वोट का कोई महत्व नहीं?
स्थिति बहुत खराब है! गांधी सरकार हो मोदी सरकार – गरीब टैक्स दे रहा है और माल्या व निरव मोदी जैसे लोग मोटी रकम लेकर देश से पलायन कर चुके हैं, ये भारत की सच्चाई, जहां गरीब किसान को 20,000-50,000 हजार रूपए बैंक को न चुका पाने में असमर्थ होकर आत्महत्या करनी पड़ती है, जो बेचारा आपदा व फसल बर्बाद होने के कारण इस स्थिति में पहुंचता है। यहां पर बैंक को पता होता है और स्थानीय प्रशासन की मदद से गरीब को इतना परेशान पहुंचाया जाता है कि उसके पास और कोई रास्ता नहीं बचता है सिवाय आत्महत्या करने के।
गरीब को निचले स्तर से उठने का मौका ही नहीं दिया है। जिसके पास कम आमदनी थी और सरकार के निर्देशानुसार उसके बैंक खाते से जबरन अतिरिक्त शुल्क ले लिया गया कि उसके खाते में एक सीमा से अधिक पैसे जमा होने जरूरी हैं। जबकि एक भारी रकम का हस्तांतरण विदेशी बैंकों में होता है, इस पर बैंक व सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। इतनी विपत्ति में राजनेता गा रहे हैं – भारत माता की जय!
इतनी मोटी रकम देश से बाहर के बैंकों में ट्रांसफर होने का प्रत्यक्ष प्रभाव जिस पर पड़ रहा है वह है सामान्य वर्ग व गरीब जनता। राजनेताओं को इसका बिल्कुल असर नहीं पड़ता है, किसान मर रहा है व माल्या और निरव मोदी जैसे लोग देश में रिश्वतखोर नौकरशाही के सहयोग से इतनी मोटी रकम लेकर विदेशों में मौज कर रहे हैं – और राजनेता कह रहे हैं – भारत माता की जय!
भारत देश दुर्दशा में, लेकिन इस देश के मंत्रीगण और सरकारी नौकरशाह के लिए अमन-चैन!
विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य था – भारत में प्रभुत्व जमाना व देश को लूटना, और आज की राजनैतिक पार्टियों का लक्ष्य भी वही है – देश में प्रभुत्व जमाना और अत्याधुनिक सुविधाओं का आनंद लेते हुए देश को लूटना और अधिकाधिक रकम विदेशी बैंकों में जमा करना, जिससे उनके खानदान को जीवनभर ऐशोआराम मिलते रहें।
परिणाम भी समान हैं - विदेशी आक्रमणों के समय भारी नरसंहार हुआ था, जो आज भी राजनैतिक अव्यवस्था व सम्प्रदायवाद के चलते देश के अंदर विभिन्न-समुदायों, व्यापारी वर्गों व जनता के बीच दैनिक रूप में हो रहा है। योजनाएं लागू की जाती हैं – व्यवसाय मिलता है, कुछ विशेष वर्गों को!
घोटाले किए जाते हैं, पैसा विदेशी बैंको में जमा कर दिया जाता है। खून चूसा जाता है – सामान्य वर्ग का, गरीब का....
कभी विदेशी आक्रमणों का शिकार, तो कभी अपने विस्तारवाद नीति के अंतर्गत आंतरिक झगड़े-मनमुटाव के कारण एक राज्य/प्रांत का अन्य पर आक्रमण का सिलसिला। सैकड़ों वर्ष बीत गए, कई खोजें हुई, आधुनिक तकनीक, वैश्वीकरण जैसे कई शब्दों से मीडिया का बाजार गरम हुआ, कई सरकारें आईं, कई गईं, घोटाले हुए, मंत्री जेल गए, देश के संसाधनों का दुरूपयोग कर असीमित राशि एकत्र कर विदेशी बैंकों में जमा करवाया गया, गरीब जनता से कहा गया कि प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है, जल्द ही आप सभी को लाभ मिलेगा। धन्य हैं इस देश के मंत्रीगण और शासकीय वर्ग, जिसे जितना मिल रहा है, गैर-कानूनी तरीके अपनाकर अपने और अपनों के बैंक खाते, प्रापर्टी में इजाफा कर रहे हैं, वहीं सामान्य वर्ग के लोग प्रतीक्षारत हैं कि शायद कभी अच्छे दिन आएंगे। सरकार अपने स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों का प्रभुत्व कायम रखने के लिए अपने नेताओं और चहेतों की बहुमूल्य प्रतिमाएं बनाकर सरकारी संस्थाओं, सार्वजनिक निकायों में स्थापित करवा रही हैं।
ये पैसा, संसाधन कहां से आया है, जो आप लोग अपने पार्टियों पर खर्च कर रहे हैं, विदेशों से संसाधन जुटाकर अपने घरों को संपूर्ण सुविधायुक्त बनाकर अपने परिवार को दे रहे हैं क्या जनता की कोई जरूरत नहीं है?
जनता के नाम से सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन सामान्य वर्ग को सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पाता है, वहां पर राजनीति है, जिसकी लाठी उसकी भैंस! धनी लोग रिश्वत देकर व सरकारी तंत्र से जुड़े लोग प्रभुत्व जमाकर सुविधा पाने में सफल हो जाते हैं और गरीब बेचारा लाइन में खड़े-खड़े थककर खाली हाथ वापस घर जाता है, जो लाइन में लगने के कारण अपने काम पर नहीं जा पाया था। फिर यहां पर भी राजनीति शुरू हो जाती है, जो गरीब बेचारा लाइन में लगने के कारण अपनी दैनिक रोजमर्रा के काम पर नहीं जा पाता है, उसे हुए नुकसान पर पार्टियां एक दूसरे पर दोष लगाते रहते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी भारत में हुआ नोटबंदी और दैनिक रूप में राशन की दुकानों, अस्पतालों व सरकारी निकायों में होने वाली घटनाओं में शामिल है।
भारत देश, तेरी ऐसी विकराल स्थिति क्यों...... विदेशी आक्रमण का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है, प्रत्यक्ष उदाहरण भारत-पाक व भारत-चीन सीमाएं हैं, जहां से हर रोज कोई न कोई शिकार हो रहा है।
अब घोटाले करने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं – उदाहरण है - स्मार्ट सिटी...
वोट बैंक के लिए गांवों को गोद लेने की प्रथा जारी है। क्या और गांवों में रह रहे लोगों की वोट का कोई महत्व नहीं?
Friday, October 21, 2016
भारत देश दुर्दशा में, लेकिन इस देश के मंत्रीगण और सरकारी नौकरशाह के लिए अमन-चैन!
विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य था – भारत में प्रभुत्व जमाना व देश को लूटना, और आज की राजनैतिक पार्टियों का लक्ष्य भी वही है – देश में प्रभुत्व जमाना और अत्याधुनिक सुविधाओं का आनंद लेते हुए देश को लूटना और अधिकाधिक रकम विदेशी बैंकों में जमा करना, जिससे उनके खानदान को जीवनभर ऐशोआराम मिलते रहें।
परिणाम भी समान हैं - विदेशी आक्रमणों के समय भारी नरसंहार हुआ था, जो आज भी राजनैतिक अव्यवस्था व सम्प्रदायवाद के चलते देश के अंदर विभिन्न-समुदायों, व्यापारी वर्गों व जनता के बीच दैनिक रूप में हो रहा है। योजनाएं लागू की जाती हैं – व्यवसाय मिलता है, कुछ विशेष वर्गों को!
घोटाले किए जाते हैं, पैसा विदेशी बैंको में जमा कर दिया जाता है। खून चूसा जाता है – सामान्य वर्ग का, गरीब का....
कभी विदेशी आक्रमणों का शिकार, तो कभी अपने विस्तारवाद नीति के अंतर्गत आंतरिक झगड़े-मनमुटाव के कारण एक राज्य/प्रांत का अन्य पर आक्रमण का सिलसिला। सैकड़ों वर्ष बीत गए, कई खोजें हुई, आधुनिक तकनीक, वैश्वीकरण जैसे कई शब्दों से मीडिया का बाजार गरम हुआ, कई सरकारें आईं, कई गईं, घोटाले हुए, मंत्री जेल गए, देश के संसाधनों का दुरूपयोग कर असीमित राशि एकत्र कर विदेशी बैंकों में जमा करवाया गया, गरीब जनता से कहा गया कि प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है, जल्द ही आप सभी को लाभ मिलेगा। धन्य हैं इस देश के मंत्रीगण और शासकीय वर्ग, जिसे जितना मिल रहा है, गैर-कानूनी तरीके अपनाकर अपने और अपनों के बैंक खाते, प्रापर्टी में इजाफा कर रहे हैं, वहीं सामान्य वर्ग के लोग प्रतीक्षारत हैं कि शायद कभी अच्छे दिन आएंगे। सरकार अपने स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों का प्रभुत्व कायम रखने के लिए अपने नेताओं और चहेतों की बहुमूल्य प्रतिमाएं बनाकर सरकारी संस्थाओं, सार्वजनिक निकायों में स्थापित करवा रही हैं।
ये पैसा, संसाधन कहां से आया है, जो आप लोग अपने पार्टियों पर खर्च कर रहे हैं, विदेशों से संसाधन जुटाकर अपने घरों को संपूर्ण सुविधायुक्त बनाकर अपने परिवार को दे रहे हैं क्या जनता की कोई जरूरत नहीं है?
जनता के नाम से सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन सामान्य वर्ग को सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पाता है, वहां पर राजनीति है, जिसकी लाठी उसकी भैंस! धनी लोग रिश्वत देकर व सरकारी तंत्र से जुड़े लोग प्रभुत्व जमाकर सुविधा पाने में सफल हो जाते हैं और गरीब बेचारा लाइन में खड़े-खड़े थककर खाली हाथ वापस घर जाता है, जो लाइन में लगने के कारण अपने काम पर नहीं जा पाया था। फिर यहां पर भी राजनीति शुरू हो जाती है, जो गरीब बेचारा लाइन में लगने के कारण अपनी दैनिक रोजमर्रा के काम पर नहीं जा पाता है, उसे हुए नुकसान पर पार्टियां एक दूसरे पर दोष लगाते रहते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी भारत में हुआ नोटबंदी और दैनिक रूप में राशन की दुकानों, अस्पतालों व सरकारी निकायों में होने वाली घटनाओं में शामिल है।
भारत देश, तेरी ऐसी विकराल स्थिति क्यों...... विदेशी आक्रमण का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है, प्रत्यक्ष उदाहरण भारत-पाक व भारत-चीन सीमाएं हैं, जहां से हर रोज कोई न कोई शिकार हो रहा है।
अब घोटाले करने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं – उदाहरण है - स्मार्ट सिटी...
वोट बैंक के लिए गांवों को गोद लेने की प्रथा जारी है। क्या और गांवों में रह रहे लोगों की वोट का कोई महत्व नहीं?
क्या ऐसा नहीं हो सकता है, सदभाव की भावना चाहने वाले पाकिस्तान के नागरिक खुद आगे आएं, जिससे दोनों देशों की जनता को अमन-चैन अनुभव हो!
सरकार के द्वारा राजनैतिक लाभ लेने का उद्देश्य या वास्त्विक रूप में देश की रक्षा!
काफी लंबे अर्से से भारत-पाक सीमाओं, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में जान माल का नुकसान हो रहा है, सरकारें कितनी आई और बदलती गई- परंतु जम्मू-कश्मीर में नहीं बदले तो सिर्फ हालात – वहां रह रहे वासिंदों के और उन जवानों के सरहद हो कोई शहर – अपने परिवार के खातिर कहो या देश की रक्षा में लगे हैं। लगभग रोज कोई न कोई जवान व आतंकवादी अपने प्राणों की आहुति देता है। आतंकी तो तैयार रहता है अपने प्राण गंवाने के लिए जिससे कि उसकी मुलाकात जल्द से जल्दी खुदा/अल्लाह से हो जाए, पर दुखद बात यह कि जो जवान देश की सेवा भावना और अपने परिवार का पालन करने के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें न चाहते हुए भी अपनी कुर्बानी देनी पड़ती है। वर्तमान में यह एक बड़ी समस्या बन गई है। सभी को पता है, इस प्रकार की गतिविधियां रोज बढ़ रही हैं। विश्वभर के देशों ने मिलकर कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाए हैं, जिनके समूचे प्रयास से भी इस प्रकार की तुच्छ घटनाओं पर अंकुश लगाना क्यों मुश्किल हो गया है?
क्या किसी एक देश की सरकार अपने राजनैतिक लाभ के लिए बड़ा प्रयास नहीं कर पा रही है? या अन्य मित्र देश इसमें सहायता नहीं कर रहे हैं। यदि अमेरिका किसी देश में जाकर एक आतंगवादी को मार सकता है, तो भारत क्यों नहीं इस छोटे से देश पर नियंत्रण कर पा रहा है? क्यों इस घटना की प्रतीक्षा की जाती है, कि पाकिस्तान के आतंगवादी घुसपैठ करेंगे और हमारे सैनिकों को मारेंगे, तो ही हम भी उन पर कार्रवाई करेंगे।
भारत के नागरिक भी क्यों पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं? क्यों धर्म को इंसानियत से ऊपर का दर्जा दे रहे हैं?
इस तरह का नाम, पैसा व शोहरत सब बेकार...... आइए, आपको एक सामान्य जानकारी से अवगत कराते हैं......
बॉलीवुड बोले तो भारत में फ़िल्म निर्माण उद्योग यानि की भारत के मुंबई शहर में स्थित फिल्म इंडस्ट्री आमतौर पर कहें या विशेष रूप से कहें, किसी भी काम की शुरूआत पहल करने से होती है और धीरे-धीरे पब्लिक की इच्छा के अनुसार उसका आगाज आगे को होता है। इसी संदर्भ में चर्चा जारी रहेगी.....बात करें बॉलीवुड से जुड़े लोगों, परिवार व अन्य सदस्यों की, जो पब्लिक के द्वारा ही पब्लिसिटी पाते हैं और उनके उत्पादों का असर भी पब्लिक पर ही पड़ता है, सिर्फ नकारात्मक रूप में! सभी लोगों ने गौर किया होगा कि यदि कोई किसी फ़िल्म में काम करना चाहता/चाहती है, और उसके परिवार के लोग फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं, तो उन्हें किसी न किसी तरह से मिल जाता है अवसर नाम, पैसा, शोहरत कमाने का। परंतु उन लोगों का क्या जो आम पब्लिक के बीच में से बिना किसी परिचित व्यक्ति के इस बॉलीवुड इंडस्ट्री में काम करना चाहता है, तो क्या उसे आसानी से काम मिल जाता है। शायद नहीं, इसलिए आज जरूरत है लोगों को जागरूक होने की और इस पर सरकारी नियंत्रण की.... जो हीरो-हीरोइन पर्दे पर अपने जल्वे बिखेर कर पैसा और नाम कमा लेती हैं, उनकी नकल कर रही आम जनता होती है शिकार, उनके जैसे कपड़े पहनने, लाइफ स्टाइल अपनाने से। जरूरी नहीं है कि सभी इसके शिकार होते हैं, लेकिन बात आती है ऐसा हुआ क्यों, क्यों इस तरह के कृत्य पर्दे पर दिखाए गए थे। पहल कहां से हुई थी, काश ऐसा न किया होता है, शायद आम जनता को इसकी जानकारी न होती और इन इसके कोई दुष्परिणाम मिलते। एक आम सदस्य को शिकार बनना पड़ता है और सामना करना होता है कई विषम स्थितियों से, तो उसके उन्हें काम मिल पाता है। पैसा कमा भी लिया तो क्या हुआ, फिल्मी पर्दे पर दिख गए तो क्या..... कोई पूछे आज के हीरो-हीरोइनों से...क्या वो आज के अपने नाम व शोहरत को देखते हुए ये बता सकते हैं कि हां मैंने यह काम भी किया यहां आने के लिए..... यदि कोई अपनी वास्त्विक कहानी बताए तो वो इस तरह के शब्द होंगे जिन्हें कहीं भी प्रकाशित करना संपूर्ण समाज का अपमान करने जैसा होगा, क्योंकि यह सब जानकारी तो पब्लिक को ही लेनी होती है। जिसने कर दिया, दिखा दिया व कमा लिया वो चौबीसों घंटे हाई लेवल की सुरक्षा में रहते हैं। Hi friends,
Now you have easier access at how to write in Hindi without any software!
Simply use your English keyboard, and select krutidev font. Here is detailed how to: <br />
Online JournalismExplain your thoughts with using easy keyborad. You do not need any type of software. In begining you have may seems you somewhat harder, but it is not a tough task. You have to just download krutidev font 10 and install it. Very simple! Try to write now.Look at your keyboard. It has English letters like:Q W E R T YUIOP[]
A S D F G H J K L ; ‘
Z X C V B N M , . /
You can try yourself that which letter returns particular Hindi letter. It is so simple. Try to press one letter alone, then press the same letter with Shift key. You will get another letter. I hope it gives you all the respective information about :
Q W
E R
T Y U
I O P
[ ] as you press these letters, the following Hindi letters appear:
q w e
r t y u I
o p [ ]
aAnd, If Shift you press the same letters, you get the following letters:
Q W E T Y U I O P { }Like the about you press these letters now:A S D F G H J K L : The following letters appear:
a s d f g h j k l ; ‘aWith Shift key these letter appear:
A S D F G H J K L : “After that you press:Z X C V B N M < > ? , The following letters appear:z x c v b n m , . /aWith Shift key these letter appear::Z X C V B N M <
> ?You knew now how to type in Hindi. As much as you try, you are able to write easily. Some letters are written with using other keys wherein digitis are also used. But you can learn all about it easily, like: When you press the following letters singly1 2 3 4 5 6 7 8 9
10 - = \ you get the following output: 1 2 3 4 5 6 7 8 9 0 -
= \ And with Shift key you find the following letters:! @ # $ % ^ & * (
) _ + | Here some of the sings are given that can be written using simple keyborad funcations. No need to purchase any type of typing software.
Marketing is all about the customer’s experience, and customer engagement is the name of the game. Because they are always “on,” customers are potentially always addressable, and campaign management needs to be reimagined for mobility. But the traditional, linear funnel model doesn’t work anymore, because today’s customer journey is not as straightforward as it once was. But not only that, personalized campaigns, which have become mainstream in recent years, are no longer sufficient to reach the always-on consumer.
People: Strategic Alignment Is Still a Work In Progress
Marketers are on the frontlines of customer engagement with customers’ real-time demands; customers expect things done yesterday, and for them, nothing happens fast enough. By focusing on technology costs and infrastructure at the back of the house, IT often overlooks the intensity of the pace of customers’ demands, which marketing confronts daily. As a result, it’s no surprise that marketing and IT come to the table with vastly different organizations and skills. But alignment between the two roles remains crucial to the ultimate success of the organization. The CIO and the CMO need to direct their departments to be in better sync because the survey data shows that:
■ Misalignment in communication of strategic priorities persists. One of the largest gaps between IT and marketing responses in this year’s survey was the ability of the two organizations to communicate each other’s priorities. IT is more confident that it understands marketing’s priorities (68%), whereas marketing is less confident (49%) in its ability to communicate IT’s priorities (see Figure 1). The nearly 20-percentage-point difference highlights marketing’s need to better understand IT’s mindset and more fully communicate its priorities to IT.
■ IT lacks marketing expertise. Close to half of IT leaders (49%) believe that “the CIO hires staff with marketing expertise,” but only 19% of marketing leaders believe such (see Figure 2). Hiring IT professionals with marketing skills not only receives one of the lowest-scoring responses from marketers but also represents the largest disparity between IT and marketing execs’ perspectives. The 30-percentage-point difference in perception demonstrates the root cause of marketing and IT misalignment — the lack of marketing expertise and knowledge on the technology side of the house.
विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य था – भारत में प्रभुत्व जमाना व देश को लूटना, और आज की राजनैतिक पार्टियों का लक्ष्य भी वही है – देश में प्रभुत्व जमाना और अत्याधुनिक सुविधाओं का आनंद लेते हुए देश को लूटना और अधिकाधिक रकम विदेशी बैंकों में जमा करना, जिससे उनके खानदान को जीवनभर ऐशोआराम मिलते रहें।
परिणाम भी समान हैं - विदेशी आक्रमणों के समय भारी नरसंहार हुआ था, जो आज भी राजनैतिक अव्यवस्था व सम्प्रदायवाद के चलते देश के अंदर विभिन्न-समुदायों, व्यापारी वर्गों व जनता के बीच दैनिक रूप में हो रहा है। योजनाएं लागू की जाती हैं – व्यवसाय मिलता है, कुछ विशेष वर्गों को!
घोटाले किए जाते हैं, पैसा विदेशी बैंको में जमा कर दिया जाता है। खून चूसा जाता है – सामान्य वर्ग का, गरीब का....
कभी विदेशी आक्रमणों का शिकार, तो कभी अपने विस्तारवाद नीति के अंतर्गत आंतरिक झगड़े-मनमुटाव के कारण एक राज्य/प्रांत का अन्य पर आक्रमण का सिलसिला। सैकड़ों वर्ष बीत गए, कई खोजें हुई, आधुनिक तकनीक, वैश्वीकरण जैसे कई शब्दों से मीडिया का बाजार गरम हुआ, कई सरकारें आईं, कई गईं, घोटाले हुए, मंत्री जेल गए, देश के संसाधनों का दुरूपयोग कर असीमित राशि एकत्र कर विदेशी बैंकों में जमा करवाया गया, गरीब जनता से कहा गया कि प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है, जल्द ही आप सभी को लाभ मिलेगा। धन्य हैं इस देश के मंत्रीगण और शासकीय वर्ग, जिसे जितना मिल रहा है, गैर-कानूनी तरीके अपनाकर अपने और अपनों के बैंक खाते, प्रापर्टी में इजाफा कर रहे हैं, वहीं सामान्य वर्ग के लोग प्रतीक्षारत हैं कि शायद कभी अच्छे दिन आएंगे। सरकार अपने स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों का प्रभुत्व कायम रखने के लिए अपने नेताओं और चहेतों की बहुमूल्य प्रतिमाएं बनाकर सरकारी संस्थाओं, सार्वजनिक निकायों में स्थापित करवा रही हैं।
ये पैसा, संसाधन कहां से आया है, जो आप लोग अपने पार्टियों पर खर्च कर रहे हैं, विदेशों से संसाधन जुटाकर अपने घरों को संपूर्ण सुविधायुक्त बनाकर अपने परिवार को दे रहे हैं क्या जनता की कोई जरूरत नहीं है?
जनता के नाम से सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन सामान्य वर्ग को सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पाता है, वहां पर राजनीति है, जिसकी लाठी उसकी भैंस! धनी लोग रिश्वत देकर व सरकारी तंत्र से जुड़े लोग प्रभुत्व जमाकर सुविधा पाने में सफल हो जाते हैं और गरीब बेचारा लाइन में खड़े-खड़े थककर खाली हाथ वापस घर जाता है, जो लाइन में लगने के कारण अपने काम पर नहीं जा पाया था। फिर यहां पर भी राजनीति शुरू हो जाती है, जो गरीब बेचारा लाइन में लगने के कारण अपनी दैनिक रोजमर्रा के काम पर नहीं जा पाता है, उसे हुए नुकसान पर पार्टियां एक दूसरे पर दोष लगाते रहते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी भारत में हुआ नोटबंदी और दैनिक रूप में राशन की दुकानों, अस्पतालों व सरकारी निकायों में होने वाली घटनाओं में शामिल है।
भारत देश, तेरी ऐसी विकराल स्थिति क्यों...... विदेशी आक्रमण का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है, प्रत्यक्ष उदाहरण भारत-पाक व भारत-चीन सीमाएं हैं, जहां से हर रोज कोई न कोई शिकार हो रहा है।
अब घोटाले करने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं – उदाहरण है - स्मार्ट सिटी...
वोट बैंक के लिए गांवों को गोद लेने की प्रथा जारी है। क्या और गांवों में रह रहे लोगों की वोट का कोई महत्व नहीं?
सदाबहार न्यूज़ - भारत-पाकिस्तान संबंध – जानमाल की क्षति सिर्फ भारत को – आतंकवादियों को अवसर मिल रहा है – जन्नत में जाने का!
क्या ऐसा नहीं हो सकता है, सदभाव की भावना चाहने वाले पाकिस्तान के नागरिक खुद आगे आएं, जिससे दोनों देशों की जनता को अमन-चैन अनुभव हो!
सरकार के द्वारा राजनैतिक लाभ लेने का उद्देश्य या वास्त्विक रूप में देश की रक्षा!
काफी लंबे अर्से से भारत-पाक सीमाओं, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में जान माल का नुकसान हो रहा है, सरकारें कितनी आई और बदलती गई- परंतु जम्मू-कश्मीर में नहीं बदले तो सिर्फ हालात – वहां रह रहे वासिंदों के और उन जवानों के सरहद हो कोई शहर – अपने परिवार के खातिर कहो या देश की रक्षा में लगे हैं। लगभग रोज कोई न कोई जवान व आतंकवादी अपने प्राणों की आहुति देता है। आतंकी तो तैयार रहता है अपने प्राण गंवाने के लिए जिससे कि उसकी मुलाकात जल्द से जल्दी खुदा/अल्लाह से हो जाए, पर दुखद बात यह कि जो जवान देश की सेवा भावना और अपने परिवार का पालन करने के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें न चाहते हुए भी अपनी कुर्बानी देनी पड़ती है। वर्तमान में यह एक बड़ी समस्या बन गई है। सभी को पता है, इस प्रकार की गतिविधियां रोज बढ़ रही हैं। विश्वभर के देशों ने मिलकर कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाए हैं, जिनके समूचे प्रयास से भी इस प्रकार की तुच्छ घटनाओं पर अंकुश लगाना क्यों मुश्किल हो गया है?
क्या किसी एक देश की सरकार अपने राजनैतिक लाभ के लिए बड़ा प्रयास नहीं कर पा रही है? या अन्य मित्र देश इसमें सहायता नहीं कर रहे हैं। यदि अमेरिका किसी देश में जाकर एक आतंगवादी को मार सकता है, तो भारत क्यों नहीं इस छोटे से देश पर नियंत्रण कर पा रहा है? क्यों इस घटना की प्रतीक्षा की जाती है, कि पाकिस्तान के आतंगवादी घुसपैठ करेंगे और हमारे सैनिकों को मारेंगे, तो ही हम भी उन पर कार्रवाई करेंगे।
भारत के नागरिक भी क्यों पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं? क्यों धर्म को इंसानियत से ऊपर का दर्जा दे रहे हैं?
इस तरह का नाम, पैसा व शोहरत सब बेकार...... आइए, आपको एक सामान्य जानकारी से अवगत कराते हैं......
बॉलीवुड बोले तो भारत में फ़िल्म निर्माण उद्योग यानि की भारत के मुंबई शहर में स्थित फिल्म इंडस्ट्री आमतौर पर कहें या विशेष रूप से कहें, किसी भी काम की शुरूआत पहल करने से होती है और धीरे-धीरे पब्लिक की इच्छा के अनुसार उसका आगाज आगे को होता है। इसी संदर्भ में चर्चा जारी रहेगी.....बात करें बॉलीवुड से जुड़े लोगों, परिवार व अन्य सदस्यों की, जो पब्लिक के द्वारा ही पब्लिसिटी पाते हैं और उनके उत्पादों का असर भी पब्लिक पर ही पड़ता है, सिर्फ नकारात्मक रूप में! सभी लोगों ने गौर किया होगा कि यदि कोई किसी फ़िल्म में काम करना चाहता/चाहती है, और उसके परिवार के लोग फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं, तो उन्हें किसी न किसी तरह से मिल जाता है अवसर नाम, पैसा, शोहरत कमाने का। परंतु उन लोगों का क्या जो आम पब्लिक के बीच में से बिना किसी परिचित व्यक्ति के इस बॉलीवुड इंडस्ट्री में काम करना चाहता है, तो क्या उसे आसानी से काम मिल जाता है। शायद नहीं, इसलिए आज जरूरत है लोगों को जागरूक होने की और इस पर सरकारी नियंत्रण की.... जो हीरो-हीरोइन पर्दे पर अपने जल्वे बिखेर कर पैसा और नाम कमा लेती हैं, उनकी नकल कर रही आम जनता होती है शिकार, उनके जैसे कपड़े पहनने, लाइफ स्टाइल अपनाने से। जरूरी नहीं है कि सभी इसके शिकार होते हैं, लेकिन बात आती है ऐसा हुआ क्यों, क्यों इस तरह के कृत्य पर्दे पर दिखाए गए थे। पहल कहां से हुई थी, काश ऐसा न किया होता है, शायद आम जनता को इसकी जानकारी न होती और इन इसके कोई दुष्परिणाम मिलते। एक आम सदस्य को शिकार बनना पड़ता है और सामना करना होता है कई विषम स्थितियों से, तो उसके उन्हें काम मिल पाता है। पैसा कमा भी लिया तो क्या हुआ, फिल्मी पर्दे पर दिख गए तो क्या..... कोई पूछे आज के हीरो-हीरोइनों से...क्या वो आज के अपने नाम व शोहरत को देखते हुए ये बता सकते हैं कि हां मैंने यह काम भी किया यहां आने के लिए..... यदि कोई अपनी वास्त्विक कहानी बताए तो वो इस तरह के शब्द होंगे जिन्हें कहीं भी प्रकाशित करना संपूर्ण समाज का अपमान करने जैसा होगा, क्योंकि यह सब जानकारी तो पब्लिक को ही लेनी होती है। जिसने कर दिया, दिखा दिया व कमा लिया वो चौबीसों घंटे हाई लेवल की सुरक्षा में रहते हैं। Hi friends,
Now you have easier access at how to write in Hindi without any software!
Simply use your English keyboard, and select krutidev font. Here is detailed how to: <br />
Online JournalismExplain your thoughts with using easy keyborad. You do not need any type of software. In begining you have may seems you somewhat harder, but it is not a tough task. You have to just download krutidev font 10 and install it. Very simple! Try to write now.Look at your keyboard. It has English letters like:Q W E R T YUIOP[]
A S D F G H J K L ; ‘
Z X C V B N M , . /
You can try yourself that which letter returns particular Hindi letter. It is so simple. Try to press one letter alone, then press the same letter with Shift key. You will get another letter. I hope it gives you all the respective information about :
Q W E T Y U I O P { }Like the about you press these letters now:A S D F G H J K L : The following letters appear:
A S D F G H J K L : “After that you press:Z X C V B N M < > ? ,
® = Alt+0174
☺= Alt +1
☻= Alt +2
♥=Alt+3
♦=Alt+4
♣= Alt+5
♠=Alt+6
•=Alt+7
◘=Alt+8
○=Alt+9
◙=Alt+10
♂=Alt+11
♀=Alt+12
♪=Alt+13
♫=Alt+14
☼=Alt+15
►=Alt+16
◄=Alt+17
↕=Alt+18
‼=Alt+19
¶=Alt+20
§=Alt+21
▬=Alt+22
↑=Alt+24
↓=Alt+25
→=Alt+26
←=Alt+27
∟=Alt+28
↔=Alt+29
▲=Alt+30
▼=Alt+31
!=Alt+33
“=Alt+34
#=Alt+35
$=Alt+36
%=Alt+37
&=Alt+38
‘=Alt+39
(=Alt+40
)=Alt+41
*=Alt+42
+=Alt+43
,=Alt+44
-=Alt+45
.=Alt+46
/=Alt+47
0=Alt+48
Tuesday, October 4, 2016
इंडिया ऑनलाइन
Good news to the people who want to purchase property in Hill stations, near Himalaya in India
To live in hill areas near Himalayan region is good for health due to breath in fresh air, take fresh water and hiking are main characteristics and god-given facilities here. So, people like to have their own houses to spend some time when they get free from their routine works. Today, most of the people meet together online by creating their online accounts like gmail account, yahoo account by visiting its websites, and meet at different easy to use social websites / application / platforms like Facebook, LinkedIn, Instagram, and etc. There are several online applications where people can involve in with different forums of their interests, and can choose any online activity / game / quiz. To have online businesses people can have different online accounts by accepting the terms and conditions of the particular online service. Whether you want to sale or buy online, you can find best online platforms for by searching trending products and services through different search engines like google.com. yahoo.com, msn.com, rediff.com, and others you're interested. All these are available. If people visit somewhere internationally, they can use google maps with Google Search, can book hotels in any country. How much easy to get done our works has made human life easier by these online services like Amazon, Flipkart, and Paytm. A trending thing becomes more popular now "We meet with friends internationally online, but no time for our neighbor".
Want to contact online for online business, online shopping, and academic information like, Online Admission, Online Tution, and other services?
There is a wide scope to avail services offered from India. As you must know India has been a country of natural resources for that reason it is called a golden bird. So, most of the edible items cultivated here are chemical free and nutritious. And, if such products are from remote regions closer to the great Himalaya are more useful to the human-kind. These items include Wheat, Rice, Cereals / Millets, Pulses, Sugarcane, Cotton Groundnut, Tea & Coffee. Except all these items, natural herbals and many other herbs are the god gifted things found in northern region because this region is pollution free and remains colder around the year. Such environment is helpful to enhance the capacity of all these items, and keeps all these ever fresh. Really, other types of vegetables grown here are stuffs make human lives evergreen. Not only strength comes to the consumers, whole body skins turn in a newer skin with glow. That's why a number of people around the globe visit there. They enjoy of climbing rocks, zig-zag ways to pass from one place to another. while you climbs higher mountains, it seems you are about to touch the sky. It's nature and its property. Everyone can enjoy who comes here. There are a number of social sites like, Facebook, Youtube and many others to sites to connect the people around the globe who can also give proper information on any field who wish to have. Google is so helpful in finding information on various fields whatever you want. To access internet to have better knowledge on any area you can sign up in yahoo.com, gmail.com, Hotmail.com, and LinkedIn. If you have to buy or sell any type of any-any product you can go at amazon.com, alibaba.com. Weather information, tourism information and others like hotels, schools, rail services, air services, including hiking, motor sports, adventurous sports whatever you like, you can have information on all these areas from all the social sites by making good conducts with people exist already. And, Google is a main tool to find out any type of search for your keyword to provide you desired information available in the world wide web; no matter how much or less you want to use. You are looking natural herbs, like Tulsi tea – juice, kira-jari, and other herbs or looking best institutions for yours or want to increase your income by purchasing and selling best property or want to join NGOs or become a social reformer with your charity services, your intentions reach out at Google.
A developing pollution-free place to buy property is in Indore, Madhya Pradesh, India
Not only known for job opportunities people know it a suitable place to live a family life is Indore. Wide areas here and there, more scope to buy and sell residence plots, houses and buildings is in trend in Indore now. With experiencing its climate and life with nature taste is catching eyes of the people not from India as well as from the entire world
Earth has everything; you have to know the things and protect them to keep you and next generations healthy. So, by destroying resources from the earth do not take any type of risk. Earth is a platform to get energy and light from from Sun, for breathing it has Air in the environment, and to drink and wash Water from rivers. So worship it first, all other God/Goddess are next. Try to be in contact with soil, it protects from several diseases.
Saturday, October 1, 2016
How to express or write your thought
To express or write a thought we must have some or other words that make a sense following grammatical rules. The word can be single or many according to the length of the sentence we write. In a sentence we can put a number of various words together according to the grammar rules provided that it gives a sense. As much we have words we are able to make more sentences on the topic in question.
How does a child learn its language?
India is a big source of resources in IT Engineers, Doctors, and other work-forces in every work-domain. Indian talents have made their impression in various fields, and served best services with top MNCs, and other top-most companies. Want to hire resources from India?
Besides many recognized institutions, India holds many other institutions having talented students who are ready to work. Find out best institutions in north India where from you can get talented resources in IT, Engineering and Medical services! Delhi Technological University, Delhi, Netaji Subhas Institute of Technology, Delhi, Birla Institute of Technology and Science, Pilani, Thapar University, Patiala, Harcourt Butler Technological Institute, Kanpur, Motilal Nehru National Institute of Technology, Allahabad, Malaviya National Institute of Technology, Jaipur.
And, best institutions in western India like College of Engineering, Pune, Veermata Jijabai Technological Institute, Mumbai, Institute of Chemical Technology, Mumbai, Institute of Technology, Nirma University of Science & Technology, Ahmedabad, Maharashtra Institute of Technology (MIT), Pune, KJ Somaiya College of Engineering, Mumbai, Samrat Ashok Technological Institute, Vidisha, Shri Govindram Seksaria Institute of Technology and Science, Indore, Institute of Engineering and Technology, Indore,
Friday, September 9, 2016
Whether you believe or not, but it is fact that if you try to reduce your waist it results a good increase in your height. Try now!
A ingredient, called Turmeric used in most curries. It is also used as a dye, and in medicine. Curcumin is an an anti-inflammatory agent. It is useful to cure people with joint pain or arthritis. It is helpful to remove many diseases in human body, including heart disease, cancer, metabolic syndrome, Alzheimer’s and various degenerative conditions. Turmeric’s anti-inflammatory properties are compared with anti-inflammatory pharmaceutical drugs. Curcumin, a very strong antioxidant is found as an active ingredient in turmeric. The daily inclusion of turmeric helps to fight damage to cell membranes within the body and provides greater immunity to illness and disease come in human body.
At first one can not imagine whether this little plant Tulsi could be so useful to human life, even it is used for stomach, mental as well as chronicle diseases come or arise in human body through their food, environment and physical relations. However, we must care that what and how we are taking, doing somethings. Generally, we are one of the beings like others surviving on the earth. We must take advantage of being human as we are well aware of things than other beings of any-any species. So why we fall down and why we do not care other also. Talks look simpler, but do we really consider on?
Turmeric; best tonic and cream - eat and use in your skin
One universally found yellow colored stuff keeps human body fit internally and externally. Do you know?
A ingredient, called Turmeric used in most curries. It is also used as a dye, and in medicine. Curcumin is an an anti-inflammatory agent. It is useful to cure people with joint pain or arthritis. It is helpful to remove many diseases in human body, including heart disease, cancer, metabolic syndrome, Alzheimer’s and various degenerative conditions. Turmeric’s anti-inflammatory properties are compared with anti-inflammatory pharmaceutical drugs. Curcumin, a very strong antioxidant is found as an active ingredient in turmeric. The daily inclusion of turmeric helps to fight damage to cell membranes within the body and provides greater immunity to illness and disease come in human body.
At first one can not imagine whether this little plant Tulsi could be so useful to human life, even it is used for stomach, mental as well as chronicle diseases come or arise in human body through their food, environment and physical relations. However, we must care that what and how we are taking, doing somethings. Generally, we are one of the beings like others surviving on the earth. We must take advantage of being human as we are well aware of things than other beings of any-any species. So why we fall down and why we do not care other also. Talks look simpler, but do we really consider on?
How and why it is said India is a golden bird
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