विदेशी आक्रमणों का लक्ष्य था – भारत में प्रभुत्व जमाना व देश को लूटना, और आज की राजनैतिक पार्टियों का लक्ष्य भी वही है – देश में प्रभुत्व जमाना और अत्याधुनिक सुविधाओं का आनंद लेते हुए देश को लूटना और अधिकाधिक रकम विदेशी बैंकों में जमा करना, जिससे उनके खानदान को जीवनभर ऐशोआराम मिलते रहें।
परिणाम भी समान हैं - विदेशी आक्रमणों के समय भारी नरसंहार हुआ था, जो आज भी राजनैतिक अव्यवस्था व सम्प्रदायवाद के चलते देश के अंदर विभिन्न-समुदायों, व्यापारी वर्गों व जनता के बीच दैनिक रूप में हो रहा है। योजनाएं लागू की जाती हैं – व्यवसाय मिलता है, कुछ विशेष वर्गों को!
घोटाले किए जाते हैं, पैसा विदेशी बैंको में जमा कर दिया जाता है। खून चूसा जाता है – सामान्य वर्ग का, गरीब का....
कभी विदेशी आक्रमणों का शिकार, तो कभी अपने विस्तारवाद नीति के अंतर्गत आंतरिक झगड़े-मनमुटाव के कारण एक राज्य/प्रांत का अन्य पर आक्रमण का सिलसिला। सैकड़ों वर्ष बीत गए, कई खोजें हुई, आधुनिक तकनीक, वैश्वीकरण जैसे कई शब्दों से मीडिया का बाजार गरम हुआ, कई सरकारें आईं, कई गईं, घोटाले हुए, मंत्री जेल गए, देश के संसाधनों का दुरूपयोग कर असीमित राशि एकत्र कर विदेशी बैंकों में जमा करवाया गया, गरीब जनता से कहा गया कि प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है, जल्द ही आप सभी को लाभ मिलेगा। धन्य हैं इस देश के मंत्रीगण और शासकीय वर्ग, जिसे जितना मिल रहा है, गैर-कानूनी तरीके अपनाकर अपने और अपनों के बैंक खाते, प्रापर्टी में इजाफा कर रहे हैं, वहीं सामान्य वर्ग के लोग प्रतीक्षारत हैं कि शायद कभी अच्छे दिन आएंगे। सरकार अपने स्तर पर अपनी-अपनी पार्टियों का प्रभुत्व कायम रखने के लिए अपने नेताओं और चहेतों की बहुमूल्य प्रतिमाएं बनाकर सरकारी संस्थाओं, सार्वजनिक निकायों में स्थापित करवा रही हैं।
ये पैसा, संसाधन कहां से आया है, जो आप लोग अपने पार्टियों पर खर्च कर रहे हैं, विदेशों से संसाधन जुटाकर अपने घरों को संपूर्ण सुविधायुक्त बनाकर अपने परिवार को दे रहे हैं क्या जनता की कोई जरूरत नहीं है?
जनता के नाम से सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, लेकिन सामान्य वर्ग को सुविधा का कोई लाभ नहीं मिल पाता है, वहां पर राजनीति है, जिसकी लाठी उसकी भैंस! धनी लोग रिश्वत देकर व सरकारी तंत्र से जुड़े लोग प्रभुत्व जमाकर सुविधा पाने में सफल हो जाते हैं और गरीब बेचारा लाइन में खड़े-खड़े थककर खाली हाथ वापस घर जाता है, जो लाइन में लगने के कारण अपने काम पर नहीं जा पाया था। फिर यहां पर भी राजनीति शुरू हो जाती है, जो गरीब बेचारा लाइन में लगने के कारण अपनी दैनिक रोजमर्रा के काम पर नहीं जा पाता है, उसे हुए नुकसान पर पार्टियां एक दूसरे पर दोष लगाते रहते हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अभी भारत में हुआ नोटबंदी और दैनिक रूप में राशन की दुकानों, अस्पतालों व सरकारी निकायों में होने वाली घटनाओं में शामिल है।
भारत देश, तेरी ऐसी विकराल स्थिति क्यों...... विदेशी आक्रमण का सिलसिला अभी भी थमा नहीं है, प्रत्यक्ष उदाहरण भारत-पाक व भारत-चीन सीमाएं हैं, जहां से हर रोज कोई न कोई शिकार हो रहा है।
अब घोटाले करने के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं – उदाहरण है - स्मार्ट सिटी...
वोट बैंक के लिए गांवों को गोद लेने की प्रथा जारी है। क्या और गांवों में रह रहे लोगों की वोट का कोई महत्व नहीं?
सदाबहार न्यूज़ - भारत-पाकिस्तान संबंध – जानमाल की क्षति सिर्फ भारत को – आतंकवादियों को अवसर मिल रहा है – जन्नत में जाने का!
क्या ऐसा नहीं हो सकता है, सदभाव की भावना चाहने वाले पाकिस्तान के नागरिक खुद आगे आएं, जिससे दोनों देशों की जनता को अमन-चैन अनुभव हो!
सरकार के द्वारा राजनैतिक लाभ लेने का उद्देश्य या वास्त्विक रूप में देश की रक्षा!
काफी लंबे अर्से से भारत-पाक सीमाओं, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में जान माल का नुकसान हो रहा है, सरकारें कितनी आई और बदलती गई- परंतु जम्मू-कश्मीर में नहीं बदले तो सिर्फ हालात – वहां रह रहे वासिंदों के और उन जवानों के सरहद हो कोई शहर – अपने परिवार के खातिर कहो या देश की रक्षा में लगे हैं। लगभग रोज कोई न कोई जवान व आतंकवादी अपने प्राणों की आहुति देता है। आतंकी तो तैयार रहता है अपने प्राण गंवाने के लिए जिससे कि उसकी मुलाकात जल्द से जल्दी खुदा/अल्लाह से हो जाए, पर दुखद बात यह कि जो जवान देश की सेवा भावना और अपने परिवार का पालन करने के लिए काम कर रहे हैं, उन्हें न चाहते हुए भी अपनी कुर्बानी देनी पड़ती है। वर्तमान में यह एक बड़ी समस्या बन गई है। सभी को पता है, इस प्रकार की गतिविधियां रोज बढ़ रही हैं। विश्वभर के देशों ने मिलकर कई अंतर्राष्ट्रीय संगठन बनाए हैं, जिनके समूचे प्रयास से भी इस प्रकार की तुच्छ घटनाओं पर अंकुश लगाना क्यों मुश्किल हो गया है?
क्या किसी एक देश की सरकार अपने राजनैतिक लाभ के लिए बड़ा प्रयास नहीं कर पा रही है? या अन्य मित्र देश इसमें सहायता नहीं कर रहे हैं। यदि अमेरिका किसी देश में जाकर एक आतंगवादी को मार सकता है, तो भारत क्यों नहीं इस छोटे से देश पर नियंत्रण कर पा रहा है? क्यों इस घटना की प्रतीक्षा की जाती है, कि पाकिस्तान के आतंगवादी घुसपैठ करेंगे और हमारे सैनिकों को मारेंगे, तो ही हम भी उन पर कार्रवाई करेंगे।
भारत के नागरिक भी क्यों पाकिस्तान का समर्थन कर रहे हैं? क्यों धर्म को इंसानियत से ऊपर का दर्जा दे रहे हैं?
इस तरह का नाम, पैसा व शोहरत सब बेकार...... आइए, आपको एक सामान्य जानकारी से अवगत कराते हैं......
बॉलीवुड बोले तो भारत में फ़िल्म निर्माण उद्योग यानि की भारत के मुंबई शहर में स्थित फिल्म इंडस्ट्री आमतौर पर कहें या विशेष रूप से कहें, किसी भी काम की शुरूआत पहल करने से होती है और धीरे-धीरे पब्लिक की इच्छा के अनुसार उसका आगाज आगे को होता है। इसी संदर्भ में चर्चा जारी रहेगी.....बात करें बॉलीवुड से जुड़े लोगों, परिवार व अन्य सदस्यों की, जो पब्लिक के द्वारा ही पब्लिसिटी पाते हैं और उनके उत्पादों का असर भी पब्लिक पर ही पड़ता है, सिर्फ नकारात्मक रूप में! सभी लोगों ने गौर किया होगा कि यदि कोई किसी फ़िल्म में काम करना चाहता/चाहती है, और उसके परिवार के लोग फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े हैं, तो उन्हें किसी न किसी तरह से मिल जाता है अवसर नाम, पैसा, शोहरत कमाने का। परंतु उन लोगों का क्या जो आम पब्लिक के बीच में से बिना किसी परिचित व्यक्ति के इस बॉलीवुड इंडस्ट्री में काम करना चाहता है, तो क्या उसे आसानी से काम मिल जाता है। शायद नहीं, इसलिए आज जरूरत है लोगों को जागरूक होने की और इस पर सरकारी नियंत्रण की.... जो हीरो-हीरोइन पर्दे पर अपने जल्वे बिखेर कर पैसा और नाम कमा लेती हैं, उनकी नकल कर रही आम जनता होती है शिकार, उनके जैसे कपड़े पहनने, लाइफ स्टाइल अपनाने से। जरूरी नहीं है कि सभी इसके शिकार होते हैं, लेकिन बात आती है ऐसा हुआ क्यों, क्यों इस तरह के कृत्य पर्दे पर दिखाए गए थे। पहल कहां से हुई थी, काश ऐसा न किया होता है, शायद आम जनता को इसकी जानकारी न होती और इन इसके कोई दुष्परिणाम मिलते। एक आम सदस्य को शिकार बनना पड़ता है और सामना करना होता है कई विषम स्थितियों से, तो उसके उन्हें काम मिल पाता है। पैसा कमा भी लिया तो क्या हुआ, फिल्मी पर्दे पर दिख गए तो क्या..... कोई पूछे आज के हीरो-हीरोइनों से...क्या वो आज के अपने नाम व शोहरत को देखते हुए ये बता सकते हैं कि हां मैंने यह काम भी किया यहां आने के लिए..... यदि कोई अपनी वास्त्विक कहानी बताए तो वो इस तरह के शब्द होंगे जिन्हें कहीं भी प्रकाशित करना संपूर्ण समाज का अपमान करने जैसा होगा, क्योंकि यह सब जानकारी तो पब्लिक को ही लेनी होती है। जिसने कर दिया, दिखा दिया व कमा लिया वो चौबीसों घंटे हाई लेवल की सुरक्षा में रहते हैं। Hi friends,
Now you have easier access at how to write in Hindi without any software!
Simply use your English keyboard, and select krutidev font. Here is detailed how to: <br />
Online JournalismExplain your thoughts with using easy keyborad. You do not need any type of software. In begining you have may seems you somewhat harder, but it is not a tough task. You have to just download krutidev font 10 and install it. Very simple! Try to write now.Look at your keyboard. It has English letters like:Q W E R T YUIOP[]
A S D F G H J K L ; ‘
Z X C V B N M , . /
You can try yourself that which letter returns particular Hindi letter. It is so simple. Try to press one letter alone, then press the same letter with Shift key. You will get another letter. I hope it gives you all the respective information about :
Q W E T Y U I O P { }Like the about you press these letters now:A S D F G H J K L : The following letters appear:
A S D F G H J K L : “After that you press:Z X C V B N M < > ? ,
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